Last Update - 11/12/2017
 
 
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SCHOOL OF HUMANITIES
Name Post CUG No Email Id CV
Dr. R.P.S. Yadav Director 7525048021
Dr. Vinod Kumar Gupta Deputy Director/Associate Professor 7525048050 vinodkanchan25@gmail.com View
Dr. Ruchi Bajpayee Assistant Professor(Hindi) 7525048022 ruchibajpai1977@gmail.com View
Dr. Sadhna Srivastav Assistant Professor(Journalism & Masscom) 7525048150 srivastava.sadhana1@gmail.com View
Dr. Satish Chandra Jaisal Assistant Professor(Journalism & Masscom) 7525048149 sjaisal146@gmal.com View
Dr. Ram Ji Mishr Senior Consultant
Dr. Atul Kumar Mishra Academic Consultant 7525048059
Dr. Smita Agarwal Academic Consultant (Sanskrit) 7525048026 smita.rtou@gmail.com View
Dr. Abdul Hafeez Academic Consultant (Urdu) 7525048027 drhafeez76@gmail.com View

उ.प्र. राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, इलाहाबाद

विश्वविद्यालय एक दृष्टि :-
      उ.प्र. राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, इलाहाबाद प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित उत्तर प्रदेश का एक मात्र मुक्त विश्वविद्यालय है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, अधिनियम 1999 उत्तर प्रदेश, (अधिनियम संख्या 10,1999) के अन्तर्गत हुई। यह विश्वविद्यालय अपनी स्थापना वर्ष से ही सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश के अधिसंख्य जन-समुदाय में उच्च शिक्षा एवं ज्ञान-कौशल की अलख जगाने की दिशा में प्रयत्नशील है। इस विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा एवं ज्ञान में अभिवृद्धि करना है। इसके लिए विश्वविद्यालय गुणवत्तायुक्त, मूल्योन्मुखी एवं समसामयिक उच्च शिक्षा प्रदान कर रहा है। इस विश्वविद्यालय का नामकरण हिन्दी के प्रबल समर्थक, प्रख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, भारतरत्न राजर्षि पुरुषोत्तमदास टण्डन के नाम पर किया गया। विश्वविद्यालय शिक्षा द्वारा गृहणियों, विकलांगों, दलितों, आर्थिक रूप से विपन्न वर्ग, शिक्षा से विरत व्यक्तियों तथा सुदूर ग्रामीण अंचलों के निवासियों तक उच्च शिक्षा को पहुँचाने के लिए दृढ़ संकल्पित है। इस विश्वविद्यालय ने अत्यल्प समय में ही उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नवीन कीर्तिमान स्थापित किये हैं।

        इस विश्वविद्यालय का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश है। विश्वविद्यालय द्वारा उच्च शिक्षा को सर्वसुलभ बनाने हेतु सम्पूर्ण प्रदेश में लगभग 700 अध्ययन केन्द्रों की स्थापना की गई है। विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुव्यवस्थित, सुदृढ़ एवं सुसंचालित करने हेतु प्रदेश के सुदूर जनपदों में 10 क्षेत्रीय केन्द्रों की भी स्थापना की गई है। अध्ययन केन्द्रों के माध्यम से वर्तमान में लगभग 60000 से अधिक शिक्षार्थी 107 विभिन्न प्रकृति के कार्यक्रमों में पंजीकृत हैं। दूरस्थ शिक्षार्थी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के योग्य बन सकें, इसके लिए विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ शिक्षार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न रोजगारपरक, व्यावसायिक तथा कौशल विकास कार्यक्रमों को संचालित करता है। सामुदायिक केन्द्र की स्थापना की ओर भी विश्वविद्यालय तीव्र गति से अग्रसर है। विश्वविद्यालय में संचालित अनेक कार्यक्रम समाज में अत्यन्त लोकप्रिय हैं।
          दूरस्थ शिक्षा में अधिगम संसाधनों के महŸव को दृष्टिगत रखते हुए विश्वविद्यालय सूचना एवं तकनीकी की शिक्षा एवं प्रयोग पर अधिकाधिक बल देता है। शिक्षार्थियों की सुविधाओं को दृष्टिगत करते हुए तथा श्रम व समय की बचत के लिए विश्वविद्यालय ने दोनों सत्रों के प्रवेश, प्रवेशपत्र, अंक पत्र, अधिन्यास आदि को पूर्णतया ऑनलाइन कर दिया है। सूचना तकनीकी की ओर आगे बढ़ते हुए विश्वविद्यालय ने मैसिव ओपेन ऑन लाइन कोर्सेस MOOCS का विकास कर लिया है। विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित स्वअध्ययन सामग्री SLM को भी ऑनलाइन किये जाने की प्रक्रिया शीघ्र ही प्रारम्भ की जाएगी। सोशल मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका को दृष्टिगत रखते हुए विश्वविद्यालय ने अपना मोबाइल ऐप तथा व्म्त् पॉलिसी विकसित की है, जिसके माध्यम से शिक्षार्थियों को विश्वविद्यालय से सम्बन्धित समस्त सूचनाओं एवं गतिविधियों का ज्ञान दूर बैठकर भी प्राप्त हो जाता है। जन-साधारण के मध्य दूरस्थ शिक्षा प्रणाली को प्रभावी रूप में प्रस्तुत करने के लिए विश्वविद्यालय ने अपनी वेबसाइट को फेसबुक, यू-टयूब, ट्विटर आदि सोशल मीडिया उपकरणों से संयुक्त कर दिया है। विश्वविद्यालय के सरस्वती परिसर के याज्ञवल्क्य ग्रन्थालय में संचार तकनीकी के आधुनिक उपकरणों से युक्त ऑडियो विजुअल लैब स्थापित किया गया है, जिससे समस्त क्षेत्रीय केन्द्रों को सम्बद्ध कर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्च कोटि के व्याख्यानों को प्रसारित किये जाने की योजना है। विश्वविद्यालय के शैक्षणिक परिसर में स्मार्ट क्लास की व्यावस्था तीव्र गति से की जा रही है।

        भारत सरकार द्वारा प्रारम्भ किये गये ‘डिजिटल इण्डिया‘ अभियान को सार्थकता प्रदान करते हुए सूचना एवं तकनीकी के प्रयोग द्वारा विश्वविद्यालय पर्यावरण के संरक्षण के लिए अपने समस्त कार्य में पेपरलेस पद्धति पर बल दे रहा है।
विश्वविद्यालय तीन परिसरों गंगा, युमना, सरस्वती परिसर तथा यमुना परिसर में संचालित है। गंगा परिसर में प्रशासनिक भवन, कुलपति कार्यालय तथा कुलपति आवास स्थित है। गंगा परिसर में ही अतिथि गृह, कैण्टीन, पोस्ट ऑफिस, बैंक, योग सेण्टर, प्रसाधन भवन, मेडिकेयर सेण्टर आदि स्थापित हैं। सरस्वती परिसर का उपयोग शैक्षणिक कार्यों के लिए किया जाता है। इस परिसर में ही केन्द्रीय पुस्तकालय का भवन, लोकमान्य तिलक शास्त्रार्थ सभागार, याज्ञवल्क्य ग्रन्थालय, गार्गी सभागार, चरखा लैब तथा सभी विद्याशाखाएँ अवस्थित हैं। इस परिसर में लगभग एक हजार व्यक्तियों की क्षमता वाला ऑडिटोरियम ( प्रेक्षागृह) निर्माणाधीन है।
       विश्वविद्यालय के तृतीय यमुना परिसर में क्षेत्रीय केन्द्र इलाहाबाद के नव निर्मित भवन में क्षेत्रीय केन्द्र इलाहाबाद का संचालन किया जा रहा है। साथ ही इस परिसर में विश्वविद्यालय के अध्यापकों एवं कर्मचारियों के लिए आवास का निर्माण प्रक्रियाधीन है।
       ‘ग्रीन कैम्पस, क्लीन कैम्पस‘ की अवधारणा एवं पर्यावरण के संतुलन को दृष्टिगत रखते हुए विश्वविद्यालय के तीनों परिसरों में वृहद स्तर पर वृक्षारोपण किया गया है तथा परिसरों में सोलर लाइट की भी व्यवस्था की गई है। प्रशासनिक एवं शैक्षणिक परिसरों में सुरक्षा के लिए सी.सी.टी.वी. कैमरे की भी व्यवस्था है।
        वर्तमान में विश्वविद्यालय शैक्षणिक गतिविधियों में अपना स्थान सुदृढ़ कर चुका है। शिक्षार्थियों एवं प्राध्यापकों के शैक्षिक सम्वर्द्धन एवं उन्नयन हेतु विश्वविद्यालय प्रतिवर्ष संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, व्याख्यान, प्रशिक्षण कार्यक्रमों आदि का आयोजन करता है। वर्तमान में इनकी संख्या सौ से अधिक हो चुकी है। विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं उन्हें व्यवस्थित जीवन जीने की कला सीखाने हेतु ‘मुक्तिप्रद परिवर्तन अध्ययन केन्द्र‘ की स्थापना की गई। भारतीय संस्कृति एवं मूल्यों के ज्ञान हेतु महापुरुषों के नाम पर विश्वविद्यालय में व्याख्यानमालाएं आयोजित की जाती हैं। इसी श्रृंखला में प्रतिवर्ष ‘राजर्षि पुरुषोत्तमदास टण्डन स्मृति व्याख्यानमाला‘ आयोजित की जाती है। शिक्षा को सामाजिकता एवं राष्ट्रीयता से जोड़ते हुए प्रतिवर्ष राष्ट्रीय पर्वों का वृहद आयोजन विश्वविद्यालय में किया जाता है। इसके साथ ही शिक्षार्थियों के व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के लिए महापुरुषों की जयन्तियों, विश्व योगदिवस, पर्यावरण दिवस, शिक्षा दिवस, विश्व एड्स दिवस, सांख्यिकी दिवस आदि के अवसर पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों, गोष्ठियों एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन विश्वविद्यालय करता है। अन्तर्विश्वविद्यालयी प्रतियोगिताओं के अन्तर्गत निबन्ध प्रतियोगिताओं, भाषण प्रतियोगिताओं आदि के साथ-साथ इस वर्ष युवा संगम का भव्य आयोजन किया गया। शोध की दिशा में सार्थक प्रयास करते हुए ‘श्री अटल बिहारी बाजपेई पीठ‘ की स्थापना तथा ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय पीठ‘ की स्थापना विश्वविद्यालय द्वारा की गई है। इनके माध्यम से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक कार्यशैली का जीवन्त उदाहरण यहाँ की दिनों दिन बढ़ती हुई छात्र संख्या है। वर्तमान में दूरस्थ शिक्षा प्रणाली मात्र शिक्षा ग्रहण करने का विकल्प न होकर शिक्षार्थियों की पहली पसन्द बन गयी है। विश्वविद्यालय द्वारा संचालित सभी कार्यक्रम सक्षम निकायों द्वारा मान्यता प्राप्त हैं तथा इनमें से अनेक कार्यक्रम ऐसे हैं, जो जनसामान्य के मध्य अत्यन्त लोकप्रिय हैं। विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा एवं गरिमा के कारण अनेक उच्च पदस्थ अधिकारियों, प्रख्यात चिकित्सकों, सामाज के विशिष्ट नागरिकों एवं सम्मानित व्यावसायियों ने यहाँ से शिक्षा ग्रहण की है।
  विश्वविद्यालय द्वारा प्रदत स्व-अध्ययन सामाग्री अत्यन्त उच्चकोटि की एवं स्तरीय है। स्व-अध्ययन सामग्री का लेखन प्रख्यात विषय-विशेषज्ञों द्वारा सरल -सुबोध भाषा में कराया जाता है। समय-समय पर विषय-विशेषज्ञों की समिति द्वारा पाठ्यक्रमों का पुनर्निरीक्षण किया जाता हैं जिससे स्व-अध्ययन सामाग्री की समसामयिकता एवं उपयोगिता बनी रहती हैं । विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित परामर्श सत्रों के मध्य अनुभवी, कुशल,  विषय विशेषज्ञों द्वारा शिक्षार्थियों की समस्याओं का निराकरण किया जाता है। विश्वविद्यालय द्वारा दो सत्रों में ‘वर्ष पर्यन्त प्रवेश‘ की तथा वर्ष में दो बार परीक्षा की व्यवस्था की गई है। विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा एवं मूल्यांकन में शुचिता एवं पारदर्शिता पर विशेष बल दिया जाता है। विश्वविद्यालय द्वारा त्रिस्तरीय मूल्यांकन की व्यवस्था की गई है। 
विश्वविद्यालय अद्यतन 11 दीक्षान्त समारोहों का भव्य एवं सफल आयोजन कर चुका है। इन दीक्षान्त समारोहों में उत्तीर्ण शिक्षार्थियों को उपाधि एवं प्रत्येक विद्याशाखा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले शिक्षार्थी को विश्वविद्यालय के कुलाधिपति जी के कर कमलों से स्वर्ण पदक प्रदान किया जाता है। वर्तमान में विश्वविद्यालय द्वारा 20 स्वर्ण पदक प्रदान किये जा रहे हैं। 
 
विश्वविद्यालय का उददेश्य : 
विश्वविद्यालय दूरस्थ शिक्षा पद्धति के माध्यम से अधिसंख्य जनसमुदाय में शिक्षा और ज्ञान के प्रसार में अभिवृद्धि करेगा और अपने क्रियाकलापों को संचालित करने में अनुसूची में विनिर्दिष्ट उद्देश्यों का सम्यक ध्यान रखेगा ।

विश्वविद्यालय का लक्ष्य :
  • ‘हम पहुँचे वहाँ, पहुँचा ना कोई जहाँ ‘ , की सार्थकता।
  • उच्च शिक्षा में दूरस्थ शिक्षा विधि के माध्यम से उत्कृष्टता की प्राप्ति।
  • व्यावसायिक एवं रोजगापरक पाठ्यक्रम।
  • निर्धन एवं वंचित को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध करवाना।
  • महिला सशक्तिकरण हेतु समुचित पाठ्यक्रम।
  • सेवारत वर्ग को शैक्षणिक उत्थान हेतु सहयोग प्रदान करना।
  • लचीली शैक्षणिक व्यावस्था द्वारा ज्ञान पिपासुओं को लाभ पहुँचाना।
  • एक आभासीय विश्वविद्यालय का स्वरूप ग्रहण करना।
 

 विश्वविद्यालय की विशेषताएँ एवं सुविधाएँ : 

  • ‘कभी भी, कहीं भी, कोई भी‘ की संकल्पना पर विश्वविद्यालय में वर्ष पर्यन्त प्रवेश की व्यवस्था।
  • दो सत्रों में प्रवेश- जुलाई सत्र , जनवरी सत्र।
  • शिक्षण की व्यवस्था सम्पूर्ण प्रदेश में अवस्थित अध्ययन केन्द्रों के माध्यम  से।
  • ंदस क्षेत्रीय केन्द्रों- इलाहाबाद, वाराणसी, गोरखपुर, लखनऊ बरेली, मथुरा गाजियाबाद , झॉसी, कानपुर तथा मेरठ द्वारा शैक्षिक तथा प्रशासनिक गतिविधियों का सुचारू संचालन।
  • विश्वविद्यालय वेबसाइट पर उपलब्ध ई प्रवेश फार्म के माध्यम से ऑनलाइन प्रवेश की सुविधा। 
  • विभिन्न स्तर के 107 कार्यक्रम संचालित।
  • दो वर्षीय एम.बी.ए. कार्यक्रम। 
  • बी.एड./बी.एड. विशिष्ट कार्यक्रमों के अतिरिक्त अन्य कार्यक्रमों में प्रवेश हेतु स्थान (सीटों की संख्या) असीमित।
  • शिक्षार्थियों के लिए उम्र का कोई बन्धन नहीं। 
  • सरकारी तथा गैरसरकारी सेवारत व्यक्ति भी मुक्त विश्वविद्यालय में प्रवेश ले सकता है। 
  • सरल, सुबोध, समसामयिक स्व-अध्ययन सामग्री विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षार्थियों के पते पर प्रेषित की जाती है। 
  • अध्ययन केन्द्रों पर परामर्श सत्रों का आयोजन किया जाता है। 
  • दूरस्थ शिक्षा पद्धति के अन्तर्गत शिक्षार्थियों को कार्यक्रम के द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के प्रवेश के लिए परीक्षाफल घोषित होने की प्रतीक्षा नहीं करनी होती है।
  • कार्यक्रम पूर्ण करने के लिए न्यूनतम के साथ अधिकतम अवधि का प्रावधान।
  • विश्वविद्यालय के नियमानुसार कार्यक्रम -परिवर्तन, विषय- परिवर्तन, अध्ययनकेन्द्र - परिवर्तन तथा परीक्षाकेन्द -परिवर्तन का भी प्रावधान। 
  • अधिन्यास, प्रवेश पत्र, अंक पत्र आदि विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर ऑनलाइन उपलब्ध। 
  • प्रदेश के लगभग सभी जनपदों में परीक्षा केन्द्र की उपलब्धता। 
  • उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय के किसी कार्यक्रम के प्रवेशार्थी / शिक्षार्थी अन्य विश्वविद्यालय में भी छात्र रह सकते हैं , परन्तु उसी प्रकृति अर्थात् उसी स्तर की उपाधि, डिप्लोमा एवं प्रमाण-पत्र कार्यक्रम में प्रवेश नहीं ले सकते हैं। दूरस्थ शिक्षा पद्धति अथवा दूरस्थ एवं परम्परागत शिक्षा पद्धति से उसी विश्वविद्यालय अथवा विभिन्न विश्वविद्यालय/ संस्थाओं में कोई अध्ययनरत शिक्षार्थी निम्न संयोजन के अनुसार कार्यक्रमों में प्रवेश लेने का विकल्प चुन सकता है :- 
  • एक डिग्री एवं एक डिप्लोमा/ परास्नातक डिप्लोमा/ प्रमाण-पत्र कार्यक्रम।
  • एक परास्नातक डिप्लोमा एवं डिप्लोमा/ प्रमाण-पत्र कार्यक्रम।
  • एक डिप्लोमा एवं एक प्रमाण-पत्र कार्यक्रम।
  • दो परास्नातक कार्यक्रम डिप्लोमा।
  • दो डिप्लोमा कार्यक्रम।
  • दो प्रमाण-पत्र कार्यक्रम।
  • स्नातक एवं परास्नातक स्तर के सभी पाठ्यक्रम CBCS पर आधारित।
  • परीक्षा प्रणाली : सेमेस्टर एवं वार्षिक 
  • लोकप्रिय कार्यक्रम : B.Ed ,B.Ed.(SE) , BLIS, BCA, MCA, MBA, MLIS,PGDJMC, MJ  आदि। 

 मानविकी विद्याशाखा : एक दृष्टि 

मानविकी विद्याशाखा विश्वविद्यालय में संचालित दस विद्याशाखाओं में से एक महŸवपूर्ण विद्याशाखा है। अन्य विद्याशाखाआें की भॉति मानविकी विद्याशाखा भी शान्तिपुरम, फाफामऊ स्थित सरस्वती परिसर नामक विश्वविद्यालय के शैक्षणिक परिसर में स्थापित की गई है। विद्याशाखा कार्यालय उपयुक्त भौतिक संसाधनों से सुसज्जित है। इस विद्याशाखा के अन्तर्गत सभी भाषाओं से संबंधित बी.ए. और एम.ए. जैसे परम्परागत ज्ञानाधारित कार्यक्रमों को संचालित किया जाता है, जैसे हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू आदि। इसके अतिरिक्त इस विद्याशाखा में इन भाषाओं तथा अर्थशास्त्र, दर्शनशास्त्र, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान तथा पत्रकारिता एवं जनंसचार जैसे महŸवपूर्ण विषयों पर भी परम्परागत कार्यक्रमों के साथ-साथ अनेक रोजगारपरक तथा व्यावसायिक प्रकार के कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के सन्दर्भ में अवधि, प्रवेश - पात्रता , शुल्क आदि से संबंधित संक्षिप्त विवरण अग्रांकित है- 

मानविकी विद्याशाखा में संचालित
कार्यक्रमों का विवरण

 कार्यक्रम का नाम
Name of The Programme

अवधि
न्यूनतम अधिकतम

सम्पूर्ण (श्रेयांक)

शुल्क
+
ऑनलाइन प्रक्रिया शुल्क

अर्हता

माध्यम

कार्यक्रम की प्रकृति

स्नातकोत्तर कार्यक्रम  
(Post Graduate Programmes)

स्नातकोत्तर कला 
(Post graduate Arts)

हिन्दी (MAHI)
अंॅग्रेजी(MAEN)
सस्कृत (MAST)
दर्शनशास्त्र(MAPH)
अर्थशास्त्र(MAEC)

 

 

2

 

4

 

 

80

 

 

7100/-

 

Graduate
(10+2+3)

 

H/E

 

 

वार्षिक

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर
(Master of journalism) (MJ)

2

4

104

6100/-

Graduate
(10+2+3)

H

सेमेस्टर

पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान
(Master of Library and Information Science) (MLIS)

1

3

62

12100/-

Bachelor of Library and information
Science (BLIS)

H

सेमेस्टर

स्नातकोत्तर डिप्लोमा  कार्यक्रम
Post Graduate Diploma Programmes

 

अनुवाद में स्नातकोत्तर डिप्लोमा
Post Graduate Diploma in Translation
[PGDT]

 

1

 

3

 

40

 

4100/-

Graduate (10+2+3) with
Hindi/ Eng. as one of the
subject with adequate
Knowledge and
proficiency in Hindi/Eng.

 

 
  H

 

वार्षिक

हिन्दी में रचनात्मक लेखन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा
Post Graduate Diploma in Creative Writing
in Hindi [PGDCWH]

1

3

40

4100/-

Graduate (10+2+3) with
Hindi as a subject at
Degree level

H

वार्षिक

प्रयोजनमूलक हिन्दी में स्नातकोत्तर डिप्लोमा
Post Graduate Diploma in Functional Hindi
(PGDFH)

1

3

40

4100/-

Graduate
(10+2+3)
With Hindi as a subject at Degree Level

H

वार्षिक

ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर डिप्लोमा
Post Graduate Diploma in Rural Journalism and
Mass Communication (PGDRJMC)

1

3

40

4100/-

Graduate
(10+2+3)

H

वार्षिक

आध्यात्मिक पर्यटन में स्नातकोŸार डिप्लोमा
Post Graduate Diploma in Spiritual Tourism
(PGDST)

1

3

40

4100/-

Graduate
(10+2+3)

H

वार्षिक

इलेक्ट्रानिक मीडिया प्रबन्धन एवं फिल्म प्रोडक्शन में
स्नातकोत्तर डिप्लोमा
(Post Graduate Diploma in Electronic Media
Management and Film Production) [PGDEM&FP]

1

3

40

7100/-

Graduate
(10+2+3)

H

वार्षिक

पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर डिप्लोमा
Post Gradutate Diploma in Journalism and
Mass Communication
(PGDJMC).

1

3

40

6100/-

Graduate
(10+2+3)

H

सेमेस्टर प्रणाली

कार्यक्रम का नाम
Name of The Programme

अवधि
न्यूनतम अधिकतम

सम्पूर्ण (श्रेयांक)

शुल्क
+
ऑनलाइन प्रक्रिया शुल्क

अर्हता

माध्यम

कार्यक्रम की प्रकृति

स्नातक  कार्यक्रम (Graduate Programmes)

 

स्नातक कला (B.A.)

 

हिन्दी   (UGHI)
अंॅग्रेजी    (UGEN)
सस्कृत    (UGST)
दर्शनशास्त्र (UGPH)
अर्थशास्त्र (UGEC)
उर्दू(UGUR)

 

 

3    

 

 

6

 

 

124

 

 

3600/-

 

 (10+2)

 

H/E/U

 

 

वार्षिक

पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान स्नातक
(Bachelor of Library and Information Science) (BLIS)

1

3

48

7600/-

Graduate
(10+2+3)

H

सेमेस्टर 

सामान्य  डिप्लोमा कार्यक्रम 
 (General  Diploma Programmes)

डिप्लोमा इन फोटोग्राफी
Diploma in Photography [DIP]

1

3

40

4600/-

(10+2)

E

वार्षिक

डिप्लोमा इन उर्दू
Diploma in Urdu (DUR)

1

3

40

4100/-

10+2 Pass (with
Urdu as one of the
Subjects) Or its
Equivalent or a
Certificate in Urdu
Language from
IGNOU

Urdu

वार्षिक

डिप्लोमा इन उर्दू जर्नलिज्म एण्ड मास कम्यिनकेशन
Diploma in Urdu Journalism & Mass
Communication (DUJMC)

1

3

40

4100/-

10+2 Pass (with
Urdu as one of the
Subjects) Or its
Equivalent or a
Certificate in Urdu
Language from
IGNOU

Urdu

वार्षिक

डिप्लोमा इन उर्दू न्यजू रीडिगं एण्ड एकंरिगं
Diploma in Urdu News Reading &
Anchoring (DUNRA)

1

3

40

4100/-

10+2 Pass (with
Urdu as one of the
Subjects) Or its
Equivalent or a
certificate in Urdu
Language from
IGNOU

Urdu

वार्षिक

प्रमाण-पत्र कार्यक्रम  
(CertificateProgrammes)

 

ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में प्रमाण-पत्र
Certificate in Rural Journalism and Mass
Communication [CRJMC]

½  

2

24

2100/-

(10+2)

H

सेमेस्टर

  • यह विवरण निर्धारित शैक्षणिक सत्र के लिए ही मान्य है। कार्यक्रम शुल्क में ही प्रवेश शुल्क, पंजीकरण शुल्क एवं परीक्षा शुल्क सम्मिलित है।

  • यदि विश्वविद्यालय द्वारा किसी शैक्षणिक सत्र के लिए कार्यक्रम शुल्क में किसी भी प्रकार का संशोधन एवं परिवर्तन किया जाता है तो वह उस वर्ष के सभी (प्रथम वर्ष, द्वितीय वर्ष एवं तृतीय वर्ष के) पुराने और नए शिक्षार्थियों पर समान रूप से लागू होगा।

  • शुल्क एवं अन्य सूचना हेतु विश्वविद्यालय की वेबसाइट तथा ई-प्रवेश विवरणिका अनिवार्य रूप से देखें।

  • तीन साहित्य एक साथ नहीं लिए जा सकते हैं। हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत एवं उर्दू में से केवल दो साहित्यिक विषय एक साथ लिए जा सकते हैं।

  • साहित्यिक विषयों के साथ सांख्यिकी विषय का भी चयन किया जा सकता है।

 इस विद्याशाखा का उद्देश्य शिक्षार्थियों को भाषाओं का सम्यक ज्ञान कराना तथा उन्हें अर्थ व्यवस्था, भारतीय संस्कृति एवं मनीषियों के दर्शन से अवगत कराकर उन्हें एक उत्कृष्ट नागरिक बनाना है। पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान तथा पत्रकारिता एवं जनसंचार जैसे महत्वपूर्ण विषय के अध्ययन से वर्तमान में रोजगार और देश के विकास हेतु मानवीय संसाधनों की समुन्नति की अपार सम्भावनाएँ हैं। दूरस्थ एवं मुक्त शिक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता इसका शिक्षार्थी केन्द्रित लचीलापन है, जो मानविकी विद्याशाखा के शैक्षिक कार्यक्रमों की व्यवस्था में भी दिखाई देता है। इस विद्याशाखा में वार्षिक तथा सेमेस्टर पद्धति दोनों पर आधारित कार्यक्रम विद्यमान है। 
शोध के क्षेत्र में तीव्र गति से विकास करते हुए विश्वविद्यालय ने शोध नियमों एवं मानकों में परिमार्जन किया है, जिसके शासन द्वारा अनुमोदन की प्रक्रिया चल रही है। इन शोध नियमों का अनुपालन करते हुए मानविकी विद्याशाखा के अन्तर्गत हिन्दी, अर्थशास्त्र, पत्रकारिता एवं जनसंचार तथा पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विषयों में शीघ्र ही पी-एच.डी. कार्यक्रमों में प्रवेश प्रारम्भ किया जायेगा।  पी-एच.डी. कोर्स वर्ग में मानविकी विद्याशाखा के अन्तर्गत संचालित विषयों गॉधी चिन्तन एवं चरखा तथा ग्रामीण अध्ययन को सम्मिलित किया गया है। जिससे हमारे शोध छात्रों में उच्च नैतिक व सामाजिक मूल्यों का विकास हो सके। इससे उनके शोधोन्मुख ज्ञान का समाज के हित में रचनात्मक प्रयोग संभव हो सकेगा। 
शिक्षार्थियों एवं प्राध्यापकों की अकादमिक उन्नति हेतु मानविकी विद्याशाखा द्वारा को विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले दीक्षान्त समारोहों, राजर्षि टण्डन स्मृति व्याख्यानमाला तथा विभिन्न अवसरों पर आयोजित व्याख्यान कार्यक्रमों में प्रस्तुत किये गये अतिथि वक्ताओं के अभिभाषणों का संकलन करके उनका ‘दीक्षान्तिका‘ तथा ‘वैचारिकी‘ जैसी सारगर्भित पुस्तिकाओं का प्रकाशन किया गया है। इसके अतिरिक्त महापुरुषों की जयन्तियों एवं अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर विचार गोष्ठियों तथा निबन्ध - सम्भाषण प्रतियोगिताओं के आयोजन द्वारा मानविकी विद्याशाखा ने शैक्षिक क्षेत्र में सशक्त नवाचार को प्रोत्साहन देने के साथ -साथ दूरस्थ शिक्षा के प्रसार में अहम भूमिका निभाई है। 

 मानविकी विद्याशाखा के प्राध्यापकगण

1. डॉ. आर.पी.एस.यादव, निदेशक

2. डॉ. विनोद कुमार गुप्त, उपनिदेशक एवं सह- आचार्य ( संस्कृत)

3. डॉ. रुचि बाजपेई, वरिष्ठ सहायक आचार्य ( हिन्दी)

4. डॉ. साधना श्रीवास्तव, सहायक आचार्य, पत्रकारिता एवं जनसंचार

5. डॉ. सतीश चन्द्र जैसल, सहायक आचार्य, पत्रकारिता एवं जनसंचार

6. डॉ. रामजी मिश्र, वरिष्ठ परामर्शदाता, आडियो विजुअल लैब

7. डॉ. स्मिता अग्रवाल, शैक्षणिक परामर्शदाता (संस्कृत)

8. डॉ. अतुल कुमार मिश्र, शैक्षणिक परामर्शदाता (दर्शनशास्त्र)

 स्नातक कार्यक्रम (वार्षिक आधार)

स्नातक कार्यक्रम अध्ययन योजना 

स्नातक उपाधि स्तर के कार्यक्रमों क्रमशः स्नातक कला कार्यक्रमों को पूरा करने के लिए न्यूनतम अवधि तीन वर्ष है। स्नातक कार्यक्रम में प्रत्येक शिक्षार्थी को कुल 124 क्रेडिट के पाठ्यक्रम का अध्ययन करना अनिवार्य है। इसके अन्तर्गत शिक्षार्थी को अपने चयनित तीनों विषयों के 8-8 क्रेडिट के 3 अनिवार्य प्रश्न-पत्रों (अर्थात कुल 24 क्रेडिट) का प्रत्येक वर्ष में अध्ययन करना अनिवार्य है। जिन विषयों में 8 क्रेडिट से कम के प्रश्न-पत्र भी हैं, उन विषयों के शिक्षार्थी को तीन से अधिक प्रश्नपत्रों का अध्ययन कुल 24 क्रेडिट को पूरा करने के लिए करना होगा। इसके साथ ही तीनों विषयों का एक-एक विषय केन्द्रित वैकल्पिक प्रश्नपत्र (08 क्रेडिट) प्रथम वर्ष में, द्वितीय वर्ष में तथा तृतीय वर्ष में लेना होगा। विषय केन्द्रित वैकल्पिक पाठ्यक्रम के अन्तर्गत प्रथम विषय का वैकल्पिक प्रश्न-पत्र प्रथम वर्ष में, द्वितीय विषय का वैकल्पिक प्रश्न-पत्र द्वितीय वर्ष में तथा तृतीय विषय का वैकल्पिक प्रश्न-पत्र तृतीय वर्ष में पढ़ना होगा। आधार पाठ्यक्रम (Foundation Course) के अन्तर्गत तीनों वर्षों में अनिवार्य आधार पाठ्यक्रम के एक-एक प्रश्नपत्रों (नॉन क्रेडिट) को प्रथम वर्ष में UGFODL द्वितीय वर्ष में CHEQ/EA। तथा तृतीय वर्ष में UGFIT  का अध्ययन करना अनिवार्य है। आधार पाठ्यक्रम के एक वैकल्पिक प्रश्नपत्र को प्रथम वर्ष में स्नातक कला के शिक्षार्थियों को UGFST (04 क्रेडिट) तथा द्वितीय वर्ष में UGFEG अथवा UGFHD (04 क्रेडिट) में से एक तथा सभी शिक्षार्थियों को तृतीय वर्ष DM अथवा AOCHE अथवा AOCNC अथवा SWM (04 क्रेडिट) में से किसी एक प्रश्न-पत्र को पूर्ण करना अनिवार्य है।

कौशल विकास से सम्बन्धित वैकल्पिक पाठ्यक्रमों में से अपने स्नातक कार्यक्रम की अवधि के द्वितीय एवं तृतीय वर्ष में 8-8 क्रेडिट के एक-एक का प्रश्न-पत्र अपने सम्बन्धित पाठ्यक्रमों में से चयन कर अध्ययन करना अनिवार्य है।

इस प्रकार शिक्षार्थी को प्रथम वर्ष में 36 क्रेडिट, द्वितीय वर्ष में 44 क्रेडिट तथा तृतीय वर्ष में 44 क्रेडिट को पूर्ण करने के लिए प्रश्न-पत्रों का चयन करते हुए कुल 124 क्रेडिट को पूर्ण करना अनिवार्य है। तीनों वर्षों में 124 क्रेडिट को पूर्ण न करने की दशा में उनका कार्यक्रम पूर्ण नहीं माना जायेगा। शिक्षार्थी को अपने कार्यक्रम अवधि के दौरान ही नॉन-क्रेडिट प्रश्नपत्रों को भी उŸार्ण करना भी अनिवार्य है। नॉन-क्रेडिट प्रश्नपत्रों  को पूर्ण न करने की दशा में शिक्षार्थी का पाठ्यक्रम पूरा नहीं माना जायेगा तथा उसे उपाधि प्रदान नहीं की जाएगी।

 विश्वविद्यालय के द्वारा संचालित बी.ए. पाठ्यक्रम के वर्षवार क्रेडिट का प्रारूप निम्नवत वर्णित हैं-

 

 स्नातक कला (बी.ए.) 

 

 

 

कार्यक्रम वर्ष

 

विषय केन्द्रित अनिवार्य पाठ्यक्रम का क्रेडिट

 

विषय केन्द्रित वैकल्पिक पाठ्यक्रम का क्रेडिट

 

अनिवार्य आधार पाठ्यक्रम (नॉंन-क्रेडिट)

 

वैकल्पिक आधार पाठ्यक्रम का क्रेडिट

 

कौशल विकास कार्यक्रम का

 

क्रेडिट

 

कुल क्रेडिट

 

बी.ए.

 

 

 

प्रथम वर्ष

 

 

 

24
प्रत्येक विषय का एक-एक प्रश्नपत्र

 

 

 

08
प्रथम विषय का एक प्रश्नपत्र

 

 

 

नॉंन-क्रेडिट

 

 

 

04

 

 

 

_

 

 

 

बी.ए.

 

 

 

द्वितीय वर्ष

 

 

 

बी.ए.

 

 

 

द्वितीय वर्ष

 

 

 

24
प्रत्येक विषय का एक-एक प्रश्नपत्र

 

08
द्वितीय विषय का एक प्रश्नपत्र

 

 

 

नॉंन-क्रेडिट

 

 

 

04

 

 

 

08

 

 

 

44

 

बी.ए.

 

 

 

तृतीय वर्ष

 

 

 

24
प्रत्येक विषय का एक-एक प्रश्नपत्र

 

 

 

08
तृतीय विषय का एक प्रश्नपत्र

 

 

 

नॉंन-क्रेडिट

 

 

 

04

 

 

 

08

 

 

 

44

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सम्पूर्ण कार्यक्रम का कुल क्रेडिट-                                                                                   124

 

 

 

 

 

 

 स्नातक कला (बी.ए.) कार्यक्रम हेतु पाठ्यक्रम चयन की विधि एवं रूपरेखाः- (Click To View)

 UGFODL
Foundation Course in Open and Distance Learning
मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा

(Click To View) 

CHEQ& EA
Foundation Course in Environment Awareness 
 
पर्यावरण संबंधी योग्यता प्रदायी आधार पाठ्यक्रम

(Click To View)  

 UGFIT
Foundation Course in Information Technology 
सूचना प्रौद्योगिकी में आधार पाठ्क्रम

(Click To View)   

UGFST
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में आधार पाठ्यक्रम
Foundation Course in Science and Technology

 (Click To View)

 UGFEG
अंग्रेजी में आधार पाठ्यक्रम
Foundation Course in English-I

  (Click To View)

UGFHD
Foundation Course in Hindi
हिन्दी में आधार पाठ्यक्रम

(Click To View)

DM
Foundation course in Disaster Management
आपदा प्रबन्धन में आधार पाठ्क्रम

(Click To View)

 AOCHE
Foundation Course  in Human Environment

(Click To View)

AOCNC
Nutrition for the Community
समुदायिक पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा

 (Click To View)

SWM
SOLID WASTE MANAGEMENT

 (Click To View)

UGHI हिन्दी
UGHI-01 ( हिन्दी गद्य
)

 (Click To View)

UGHI-02
हिन्दी काव्य

 (Click To View)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 
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